पतली गली

अकसर सुनते हैं कि जो लोग आरक्षण से आते हैं वे अपना काम ठीक से नहीं कर पाते, उनमें योग्यता नहीं होती। ‘पतली गली’ में कुछ दिन हम बात करेंगे उन लोगों की जो आरक्षण से नहीं आते और जिनमें ‘योग्यता’ होती है।

थोड़ा-सा इंतज़ार..
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मित्रों, ‘पतली गली’ स्तम्भ शुरु करते वक्त यह नहीं सोचा था कि ‘योग्यता’ का परिचय इस रुप में भी आपसे कराना पड़ सकता है। फ़िलहाल यहीं से शुरुआत समझिए:


 

वर्चुअल चोरी: गज़ल एक, शायर पाँच !


मित्रों, एक पहेली ने परेशान कर डाला है। एक ग़ज़ल पाँच जगह पाँच शायरों के साथ पायी गई है। क्या आप बता सकते हैं असली शायर कौन है ?
1.

One Media Person

2-

mirzapur WWW.MIRZAPURDARSHAN.COM


3-

http://atulksingh.spaces.live.com/blog/cns!2A1C6053193F67B0!298.entry


4-

दासी बना के मारा देवी बना के माराऔरत को यार तुमने कैसा चढ़ा के मारा।

5-

अनुभूति में संजय ग्रोवर की रचनाएँ/दासी बना के


मित्रों, मुझे ज़रुर बताईएगा। क्या है कि मेरी और 20-25 ग़ज़लें भी अपने ‘असली’ शायरों को ढूंढ रहीं हैं।


लेबल: इंटरनेट पर साहित्य की चोरी, ढिठाई, पहेली, बेशर्मी

1 टिप्पणी:

  1. aurat ne aurat ko mara dekhta rha smaj bechara
    kut ka kuta bairi ye lafda rha khub purana
    baki suna dunga apko jab miloge duwara
    rk vikrama sharma correspondent chandigarh press varta 09872886540/09888486540 mujh se mujh sa ban kar milo kanta nhin fool ban ke khilo

    उत्तर देंहटाएं

कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते....

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ख़ुद फंसोगे हमें भी फंसाओगे!

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ढूंढो-ढूंढो रे साजना अपने काम का मलबा.........

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देयर वॉज़ अ स्टोर रुम या कि दरवाज़ा-ए-स्टोर रुम....